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झुंझुनूं का नं. 1 न्यूज़ नेटवर्क

कोलिहान खदान हादसा: एक-एक घायल को पीठ पर बैठाकर सीढ़ियों से 12 मीटर ऊपर लेकर आए

सबसे पहले घायलों के पास पहुंचने वाले ठेका कर्मचारी की जुबानी हादसे की पूरी कहानी

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झुंझुनूं । कोलिहान खदान में जिस दिन हादसा हुआ था, उस दिन ठेका कर्मचारी विजय कुमार गुर्जर  मुकेशकुमार सैनी जीरो लेवल से माइनस 21 मीटर लेवल पर काम कर रहे थे। उन्हें सूचना दी गई थी कि मंगलवार शाम को कोलिहान खदान में विजिलेंस व कई अधिकारियों की टीम नीचे लगे क्रेशर का निरीक्षण के लिए आ रही है। हम माइनस 21 लेवल पर अधिकारियों का इंतजार कर रहे थे। विजय गुर्जर ने बताया कि जिस केज (लिफ्ट) में वे अधिकारी आ रहे थे, अचानक ही उस लिफ्ट की स्पीड बढ़ गई। लिफ्ट धमाके के साथ नीचे की तरफ गिरी और धूल-मिट्टी का गुब्बार चारों तरफ छा गया। यह देख हम घबरा गए, एकबारगी हमें कुछ भी दिखाई नहीं दिया। गुब्बार हटा तो समझ में आया कि लिफ्ट फंस गई है।

यह देख मैं और मेरा साथी कर्मचारी मुकेश बिना वक्त गंवाए सीढ़ियों के सहारे मात्र 10 मिनट बाद ही उस लिफ्ट तक पहुंच गए। हमने लिफ्ट में फंसे अधिकारियों को आवाज लगाई। उन्होंने कहा हमें बाहर निकालो और पानी पिलाओ। हम दुबारा सीढ़ियों से चढ़े और पानी लेकर आए। जिनके पैर मुड़े हुए थे, उनको सीधा किया। लिफ्ट में फंसे अधिकारियों ने बताया कि हमारे पैर टूट गए हैं जितना जल्दी हो सके, हमें बाहर निकाल लो। हमनें उनके हाथ-पांव की मालिश की। फिर दोनों ने एक-एक को पीठ पर बैठाकर सीढ़ियों से ही माइनस 76 लेवल तक पहुंचाया। करीब नौ घायलों को हम निकाल चुके थे। 2 से 3 घंटे बाद डॉक्टरों की टीम पहुंची और उनका उपचार शुरू किया। उस वक्त हमनें महसूस किया कि वह कितना खतरनाक मंजर था और इस तरह का हादसा होने पर क्या बीतती है।

एनडीआरएफ की टीम ने किया निरीक्षण

कोलिहान खदान में हुए केज हादसे के संबंध में जांच के लिए शुक्रवार को एनडीआरएफ अजमेर की टीम डिप्टी कमांडेंट अनुपम के नेतृत्व में कोलिहान खदान पहुंची तथा घटना स्थल पर जाकर आवश्यक जानकारियां जुटाई। इस टीम में योगेश कुमार मीणा सहित सात सदस्य शामिल थे। इस मौके पर थानाधिकारी खेतड़ी भंवरलाल कुमावत भी टीम के साथ रहे। वहीं, डीजीएमएस अजमेर संभाग व उदयपुर संभाग से आई टीम भी शुक्रवार को दूसरे दिन भी जांच में जुटी रही।