Jhunjhunu Update
झुंझुनूं का नं. 1 न्यूज़ नेटवर्क

उपभोक्ता आयोग सख्त, वसूली के लिए कुर्की वारंट जारी किए, फिर भी वसूली नहीं हुई तो उपभोक्ता की अपील पर सजा भुगत सकते हैं जिम्मेदार

मंड्रेला रोड स्थित अफॉर्डेबल सहभागिता आवास योजना का मामला, कलेक्टर को भिजवाया कुर्की नोटिस

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झुंझुनूं। नगर परिषद झुंझुनूं और रुडिस्को (राजस्थान अरबन ड्रिकिंग वाटर, सीवरेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) द्वारा असाही इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट लिमिटेड के जरिए अफॉर्डेबल हाऊसिंग पॉलिसी 2009 के तहत विकसित किए जा रहे मंड्रेला रोड स्थित अफॉर्डेबल सहभागिता आवास योजना में उपभोक्ताओं को पैसा एडवांस जमा करवाने के बाद भी फ्लैट तैयार करके नहीं देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अब सख्त हो गया है। सोमवार से उपभोक्ता आयोग ने वसूली कुर्की वारंट भेजना जारी कर दिया है। उपभोक्ता आयोग ने यह वसूली वारंट जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर कलेक्टर को भेजकर नगर परिषद से अवार्ड राशि वसूल कर उपभोक्ता आयोग के कार्यालय में जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में कुल 348 उपभोक्ताओं ने परिवाद दायर किए हैं। गौरतलब है कि इस संबंध में जिला आयोग के फैसले के खिलाफ नगर परिषद झुंझुनूं ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग एवं उसके बाद राष्ट्रीय आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की थी। लेकिन राज्य आयोग एवं राष्ट्रीय आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा था और सुप्रीम कोर्ट से भी नगर परिषद झुंझुनूं को राहत नहीं मिली। उसके पश्चात जिला आयोग में दायर हुए इजराय प्रार्थना पत्रों पर उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई करते हुए वसूली कुर्की वारंट जारी किए हैं। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा जिला आयोग के फैसले को यथावत रखने के बाद मामले के निपटारे के लिए असाही इंफ्रास्ट्रक्चर एवं नगर परिषद के विवाद के समाधान के लिए हाई कोर्ट ने सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया था और जस्टिस पीके तिवाड़ी आर्बिट्रेटर नियुक्त हुए थे। जिन्होंने नगर परिषद के पक्ष में फैसला देते हुए असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से 26.067 करोड़ रुपये वसूली का अवार्ड पारित किया था। आर्बिट्रेशन के लिए नगर परिषद द्वारा 18 लाख 87 हजार 500 रुपए एवं असाही इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा फीस की एक किश्त 8 लाख 49 हजार 375 रुपए जमा करवाई गई। वहीं एक किश्त बाकी है। जस्टिस तिवाड़ी ने फैसले की तिथि से रकम वसूली किए जाने तक 9 फीसदी सालाना ब्याज आरोपित करने का भी अवार्ड पारित किया था। यानी महीने का लगभग 19.5 लाख रुपए ब्याज भी वसूलने का हक नगर परिषद को मिला था। फिर भी असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से अवार्ड की राशि 26 करोड़ रुपए की वसूली नगर परिषद झुंझुनूं करवाने में असफल रही है।

यह है नगर परिषद की भूमिका
नगर परिषद ने योजना के लिए आवेदन मांगे, उपभोक्ताओं से फ्लैट्स के लिए एडवांस में रकम जमा करवाने के लिए खाता उपलब्ध करवाया। आवेदनकर्ताओं (उपभोक्ताओं) को मांग पत्र दिया व फ्लैट निर्माण की अग्रिम राशि ली। उपभोक्ताओं ने नगर परिषद द्वारा उपलब्ध करवाए गए खाते में रकम जमा करवाई। असाही ने काम चालू किया और काम पूरा होने से पहले ही नगर परिषद द्वारा भुगतान किया जाता रहा। उपभोक्ताओं को 2016 तक मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित फ्लैट्स सुपुर्द करने थे। लेकिन निर्माण कार्य भी पूरा नहीं होने पर 2017 में उपभोक्ताओं ने जिला आयोग (तब जिला उपभोक्ता मंच, अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग) का दरवाजा खटखटाया। जिला आयोग ने सुनवाई करते हुए नगर परिषद को यह आदेश दिया कि उपभोक्ताओं को या तो सुविधाओं से सुसज्जित फ्लैट्स दिए जाएं, अन्यथा उनकी रकम मय ब्याज लौटाई जाए। इसमें नगर परिषद को यह छूट दी गई कि वह असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से किसी भी तरीके से रकम वसूलने के लिए स्वतंत्र है। जिला आयोग के इस फैसले को राज्य आयोग व राष्ट्रीय आयोग ने भी यथावत रखा। उधर हाईकोर्ट में आर्बिट्रेशन पीटीशन के फैसले में असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से वसूली का अवार्ड पारित होने के बाद उपभोक्ताओं ने जिला आयोग में इजराय प्रार्थना पत्र लगाकर निर्णय की पालना करवाने का निवेदन किया। इसके बाद भी नगर परिषद के अधिकारी यह कहकर समय लेते रहे कि अवार्ड राशि नगर परिषद को प्राप्त होने पर उपभोक्ताओं को लौटा दी जाएगी। इस बीच जुलाई 2022 से लेकर मार्च 2023 तक उपभोक्ता आयोग में अध्यक्ष पद रिक्त रहने से नगर परिषद के अधिकारी तारीख पर तारीख लेते रहे। मार्च 2023 में अध्यक्ष पद पर मनोज मील के कार्यग्रहण करने के बाद उनके संज्ञान में यह मामला आया तो पाया गया कि नगर परिषद द्वारा  जिस न्यायालय के जरिए वसूली होनी है, वहां 11 माह की ताऱीख ली जा रही है। जिस पर उन्होंने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि इतनी लंबी तारीख लेने से यह मंशा जाहिर होती है कि नगर परिषद उपभोक्ताओं को न्याय में विलंब कर वसूली में लापरवाही कर रही है। जबकि नगर परिषद के पास किसी भी तरह से वसूली करने का अधिकार है। इसके बाद भी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के निर्णय की पालना नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा नहीं किए जाने पर अब वसूली वारंट जारी किए जा रहे हैं। इसके तहत जिला कलेक्टर को यह निर्देश दिए गए हैं कि नगर परिषद झुंझुनूं से अवार्ड राशि की वसूली करवाकर राशि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के कार्यालय में जमा करवाई जाए। गौरतलब है कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ताओं को भुगतान करने के लिए नगर परिषद को आदेश देने के साथ ही असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से वसूली करने की स्वतंत्रता भी दी है। यह नगर परिषद पर निर्भर करता है कि वह असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से वसूली किस प्रकार करती है। वह चाहे तो जमीन कुर्क कर नीलामी कर सकती है, वह चाहे तो कंपनी के पार्टनर्स से भी वसूली कर सकती है या अन्य भी विधिक तरीके हैं, जिनके जरिए वसूली की जा सकती है। लेकिन नगर परिषद इस मामले में गंभीर नहीं दिख रही और अनेक अवसर लेकर भी उपभोक्ताओं को जिला आयोग के आदेशों की पालना के तहत भुगतान नहीं करने पर वसूली कुर्की वारंट जारी किए जा रहे हैं। इस मामले में चूंकि फ्लैट्स के लिए आवंटन पत्र जारी करने, अग्रिम रकम नगर परिषद ने जमा करवाई थी, ऐसे में सरकारी एजेंसी होने के नाते उपभोक्ताओं को यह सहज विश्वास था कि योजना पूरी होगी और राज्य सरकार की मंशानुरुप उन्हें अफॉर्डेबल कीमत पर रहने को छत मिल सकेगी। लेकिन इस योजना के पूरा नहीं होने से जिला आयोग द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत सुनवाई करते हुए उपभोक्ताओं के हक में निर्णय सुनाया गया। जिसकी पालना में नगर परिषद ने अवार्ड राशि का भुगतान उपभोक्ताओं को नहीं किया है। जिससे न केवल राज्य सरकार की एजेंसी पर सवाल उठते हैं बल्कि आमजन में सरकार के प्रति विश्वास और साख में भी कमी आती है।
फेक्ट फाइल—
– 1536 आवास (फ्लैट्स) बनाए जाने थे योजना के तहत
– 2016 में निर्माण कार्य पूर्ण कर उपभोक्ताओं को सौंपने थे फ्लैट्स
– 176 उपभोक्ताओं को ही अब तक (2024 तक) मिल पाए हैं फ्लैट्स
– 348 उपभोक्ताओं ने दायर कर रखा है नगर परिषद और असाही इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ जिला आयोग में परिवाद दायर किए गए हैं।
-26.067 करोड़ रुपये असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से वसूली करने का अवार्ड नगर परिषद झुंझुनूं के पक्ष में पारित कर रखा है आर्बिट्रेटर जस्टिस पी के तिवाड़ी ने।
— 19 फरवरी 2021 को नगर परिषद के पक्ष में निर्णय दिया था, फिर भी अवार्ड राशि असाही इंफ्रास्ट्रक्चर से नगर परिषद वसूल नहीं कर पाई है।
– 54 करोड़ रुपए कुल परियोजना लागत में से 44 करोड़ रुपए का भुगतान असाही इंफ्रास्ट्रक्चर को नगर परिषद कर चुकी है। जबकि असाही इंफ्रास्ट्रक्चर ने काम पूरा भी नहीं किया है और भुगतान योग्य से अधिक राशि का भुगतान असाही इंफ्रास्ट्रक्चर को किया जाना भी नगर परिषद एवं रूडिस्को पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।
– 3 मुख्य सुविधाएं (पेयजल, बिजली और सीवरेज) से आज तक वंचित है इस योजना के फ्लैट्स

अब भी नहीं माने तो जेल जा सकते हैं दोषी अधिकारी
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 27 एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत उपभोक्ता कार्रवाई करवाने के लिए प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं, जिस पर जिला आयोग के आदेश की पालना नहीं करने वाले संबंधित दोषी अधिकारियों पर कम से कम 25 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक जुर्माना एवं कम से कम 1 माह से लेकर 3 वर्ष तक का कारावास की सजा दी जा सकती है।

इनका कहना है…

मनोज मील, अध्यक्ष

“उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत वसूली वारंट जारी किए गए हैं। जिला आयोग के आदेश की पालना नहीं होती है, तो विधि सम्मत कार्रवाई सम्बन्धित विभाग व अधिकारियों के विरुद्ध जिला आयोग द्वारा अमल में लाई जायेगी और मुख्य सचिव राजस्थान सरकार को भी लिखा जायेगा। अधिनियम की पवित्र भावना के अनुसार उपभोक्ताओं को न्याय मिलेगा।
– मनोज मील, अध्यक्ष, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं